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मणिपुर में शांति बहाली की कोशिश में जुटा केंद्र, मैतेई और कुकी समुदाय के साथ की अहम बैठक

मणिपुर में शांति बहाली की कोशिश में जुटा केंद्र, मैतेई और कुकी समुदाय के साथ की अहम बैठक

मणिपुर में अभी हिंसा थमी है। मगर स्थिति संतोषजनक नहीं है। पिछले चार महीने में कोई मौत नहीं हुई। इस बीच केंद्र सरकार भी शांति बहाली की कोशिश में जुटी है। शनिवार को मैतेई और कुकी समुदाय के साथ केंद्र सरकार के अधिकारियों ने अहम बैठक की। बैठक का उद्देश्य दोनों समुदायों के बीच विश्वास और शांति बहाली करना था। इस दौरान स्थिति को सामान्य बनाने पर चर्चा हुई।

मणिपुर में शांति बहाली की कोशिश। ( फोटो- एएनआई )

HIGHLIGHTSमणिपुर हिंसा में अब तक 260 लोगों की गई जान।
हजारों लोग विस्थापन का सामना भी कर चुके।
शांति बहाली का रोडमैप तैयार कर रहा केंद्र।


मणिपुर में शांति की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को मणिपुर के मैतेई और कुकी समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ केंद्र सरकार ने बैठक की है। बैठक का उद्देश्य दोनों समुदायों के बीच चल रहे संघर्ष का सौहार्दपूर्ण समाधान खोजना है।


बैठक का फोकस मैतेई और कुकी के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाना और मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति को बहाल करने के लिए रोडमैप तैयार करना है। बैठक में सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दोनों समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर अधिक जोर दिया।


बैठक में कौन-कौन था शामिल?मीटिंग में ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (एएमयूसीओ) और फेडरेशन ऑफ सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन (एफओसीएस) के प्रतिनिधियों समेत 6 सदस्यीय मैतेई प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। कुकी प्रतिनिधिमंडल में 9 लोग शामिल थे। केंद्र सरकार के वार्ताकारों में खुफिया ब्यूरो के सेवानिवृत्त विशेष निदेशक एके मिश्रा भी मौजूद रहे।


शाह ने कही थी जल्द बैठक कराने की बात

गुरुवार को लोकसभा में मणिपुर पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि गृह मंत्रालय ने पिछले दिनों मैतेई और कुकी समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों के विभिन्न संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकें की गईं।

तब उन्होंने कहा था कि गृह मंत्रालय जल्द ही एक संयुक्त बैठक बुलाएगा। अमित शाह ने कहा कि सरकार हिंसा को समाप्त करने का रास्ता तलाशने में जुटी है। मगर सर्वोच्च प्राथमिकता शांति स्थापित करना है। मणिपुर में स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है। पिछले 4 महीनों में कोई मौत नहीं हुई है। मगर इसे संतोषजनक नहीं माना जा सकता, क्योंकि विस्थापित लोग अभी राहत शिविरों में हैं।


13 फरवरी को लगा था राष्ट्रपति शासन

9 फरवरी को सीएम पद से एन बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। बता दें कि मई 2023 में इंफाल घाटी स्थित मैतेई और पहाड़ों पर बसे कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद से अब तक लगभग 260 लोगों की जान जा चुकी है। हजारों लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा।


शांति बहाली में जुटे राज्यपालपिछले साल पूर्व केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को मणिपुर का राज्यपाल बनाया गया था। भल्ला ने 3 जनवरी को अपना पदभार संभाला था। इसके बाद से वे मणिपुर के लोगों से मिल रहे हैं। थानों से लूटे गए हजारों हथियारों को सरेंडर करने की अपील भी कर चुके हैं। इसका असर यह हुआ कि बड़ी संख्या में लोगों ने प्रशासन के सामने हथियारों को जमा करवाया।
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