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सुप्रीम कोर्ट का जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करना खतरनाक मिसाल, कैश कांड में कपिल सिब्बल ने ऐसा क्यों कहा?

सुप्रीम कोर्ट का जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करना खतरनाक मिसाल, कैश कांड में कपिल सिब्बल ने ऐसा क्यों कहा?

जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने कहा कि अभी मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक किसी भी जिम्मेदार नागरिक को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी नहीं पाया जाता है तब तक उसे निर्दोष माना जाता है।


सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल। ( फाइल फोटो )

HIGHLIGHTS14 मार्च को जस्टिस वर्मा के घर पर मिला था कैश।
22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने गठित की जांच कमेटी।
सिब्बल ने कहा- गलत है या सही... समय बताएगा।

जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में मिले कैश मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक खतरनाक ट्रेंड हैं। सिब्बल का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक किसी भी जिम्मेदार नागरिक को इस मामले में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।


यह खतरनाक मिसाल
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच रिपोर्ट, वीडियो और फोटो जारी करने पर सिब्बल ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि ये उनके विवेक पर निर्भर करता है। यह गलत है या सही... यह समय बताएगा। अदालत ही दस्तावेज का स्रोत है। इस पर लोग भी विश्वास कर लेते हैं। मगर यह सच है या नहीं... ये बाद में तय होगा। मेरा मानना है कि यह खतरनाक मिसाल है। संस्थागत प्रतिक्रिया में संस्थान को लिखित में लागू करना चाहिए कि क्या करना चाहिए।

कपिल सिब्बल का कहना है कि इस पर बार के साथ सलाह करके निर्णय लिया जाना चाहिए। न्यायाधीशों के बारे में हम जीतना जानते हैं... वो भी उतना ही जानते हैं। इन मुद्दों से निपटने और तंत्र बनाने के लिए एक समिति होनी चाहिए। अगर इन चीजों को सार्वजनिक किया जाता है तो संस्था पहले ही हार चुकी होती है।

अभी तो जांच भी पूरी नहीं हुई

जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में सिब्बल ने कहा कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी नहीं पाया जाता है तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। इस मामले में तो अभी तक जांच भी पूरी नहीं हो पाई है। जांच पूरी नहीं होने तक किसी भी जिम्मेदार नागरिक को इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहिए।


14 मार्च को मिला था कैश14 मार्च को नई दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर आग लगने की घटना सामने आई थी। इसी दौरान कथित तौर पर उनके घर से नकदी मिलने के खुलासे से हड़कंप मच गया था। बाद में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।


तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। इस कमेटी में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश अनु शिवरामन को शामिल किया गया है। यह कमेटी मामले की जांच करेगी। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट की संशोधित आंतरिक जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक की। अदालत ने वीडियो और तस्वीरों को भी साझा किया।
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